ताइवान पर चीन के संभावित हमले की आहट: क्या दुनिया एक नए युद्ध की ओर बढ़ रही है?
दुनिया भर में चल रहे मौजूदा संघर्षों, जैसे रूस-यूक्रेन युद्ध और अमेरिका-ईरान तनाव के बीच, एक नए और बेहद विनाशकारी युद्ध की सुगबुगाहट तेज हो गई है। ऐसा माना जा रहा है कि चीन ताइवान पर कब्ज़ा करने की तैयारी कर रहा है, और अगर अमेरिका ताइवान को बचाने आता है, तो दो महाशक्तियों का यह टकराव एक विश्व युद्ध में बदल सकता है। अमेरिकी गुप्तचर एजेंसियों ने पहले ही अनुमान लगाया था कि चीन 2027 तक ताइवान पर हमला कर सकता है, लेकिन मौजूदा परिस्थितियों को देखकर लगता है कि यह समय से पहले भी हो सकता है।
मछली पकड़ने वाली नावों का रहस्यमयी जाल हाल ही में पूर्वी चीन सागर (East China Sea) में एक बेहद असामान्य घटना देखी गई, जिसने रणनीतिकारों को चौंका दिया है। हजारों की संख्या में चीन की मछली पकड़ने वाली नावें (जिनमें 1000 से अधिक नावें शामिल थीं) एक समन्वित (coordinated) तरीके से आईं और लगभग 30 घंटे तक समुद्र में डटी रहीं। इन नावों ने समुद्र में लगभग 400 किलोमीटर तक एक उल्टे 'L' आकार का घेरा या जाल बना लिया था।
यह कोई सामान्य गतिविधि नहीं थी, बल्कि युद्ध के समय नाकाबंदी (blockade) करने की एक रिहर्सल थी। ताइवान एक द्वीप है, और युद्ध की स्थिति में अमेरिका जापान और दक्षिण कोरिया में स्थित अपने बड़े सैन्य ठिकानों से ताइवान की मदद कर सकता है। चीन ने इन नावों का इस्तेमाल एक दीवार बनाने के लिए किया, ताकि भविष्य में जापान और दक्षिण कोरिया से आने वाली अमेरिकी सैन्य सहायता को ताइवान पहुंचने से रोका जा सके। रिपोर्ट्स के मुताबिक, चीन के पास 16,000 से अधिक ऐसी मछली पकड़ने वाली नावें हैं, जिनका इस्तेमाल वह सैन्य अवरोध पैदा करने के लिए करता है।
ताइवान की अहमियत और चीन का दावा चीन 'वन चाइना पॉलिसी' के तहत ताइवान को अपना हिस्सा मानता है और उसे वापस मुख्य भूमि में मिलाना चाहता है, जबकि ताइवान खुद को एक स्वतंत्र लोकतांत्रिक देश मानता है। ताइवान का महत्व सिर्फ भौगोलिक नहीं है; ताइवान दुनिया भर में सेमीकंडक्टर (microchips) के उत्पादन का निर्विवाद लीडर है। अमेरिका ताइवान को बचाना चाहता है ताकि भविष्य की तकनीक (जैसे AI) के लिए जरूरी इस सेमीकंडक्टर सप्लाई चैन पर चीन का एकाधिकार न हो जाए। चीन ने पहले ही दक्षिण चीन सागर के कई द्वीपों (जैसे पार्सल और स्प्रैटली आइलैंड्स) पर अपना नियंत्रण स्थापित कर लिया है ताकि इस पूरे समुद्री मार्ग पर उसका दबदबा रहे।
रणनीति में बदलाव: फाइटर जेट्स की शांति हाल के दिनों में चीन की युद्ध रणनीति में एक बहुत ही असामान्य बदलाव देखा गया है। पहले चीन ताइवान में खौफ पैदा करने के लिए लगातार अपने फाइटर जेट्स ताइवान के एयरस्पेस से गुजारता रहता था। लेकिन पिछले एक महीने से चीन ने ताइवान के ऊपर से फाइटर जेट्स भेजना लगभग पूरी तरह बंद कर दिया है। पहले जहां 300 जेट निकलते थे, अब वह संख्या न के बराबर रह गई है। फाइटर जेट्स की यह अचानक शांति और समुद्र में नावों का जाल बिछाना संकेत देता है कि चीन अब डराने के बजाय किसी ठोस सैन्य कार्रवाई की योजना बना रहा है।
वैश्विक कूटनीति और एआई (AI) का खेल अमेरिका वर्तमान में ईरान और मध्य पूर्व में उलझा हुआ है और उसे लगातार झटके लग रहे हैं, जिसका सीधा फायदा चीन को हो रहा है। ईरान को अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर सटीक हमले करने में चीन पर्दे के पीछे से मदद कर रहा है। चीन ने 'मिजार विज़न' (MizarVision) नामक एक उन्नत एआई (AI) आधारित सैटेलाइट सॉफ्टवेयर टूल ईरान को दिया है। इस टूल की मदद से सैटेलाइट इमेजेस को एनालाइज करके ईरान अमेरिकी बेस और रडार्स की सटीक लोकेशन का पता लगाने और उन्हें नष्ट करने में कामयाब रहा।
निष्कर्ष के तौर पर, अमेरिका के अपने सहयोगियों से पिछड़ने और सप्लाई चेन पर चीन की मजबूत पकड़ के कारण चीन का आत्मविश्वास काफी बढ़ गया है। दुनिया का ध्यान जब अन्य युद्धों पर लगा है, तब चीन शांति से ताइवान पर नियंत्रण पाने के लिए अपनी घेराबंदी और नाकाबंदी की रणनीतियों को पुख्ता करने में लगा हुआ है।







