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अमेरिका का 'डूम्स डे' मिसाइल परीक्षण और मंडराता परमाणु युद्ध का खतरा
हाल ही में अमेरिका ने अपनी सबसे घातक मिसाइलों में से एक 'मिनटमैन 3' (Minuteman III) का परीक्षण किया है। इस मिसाइल को 'डूम्स डे' (प्रलय के दिन की) मिसाइल भी कहा जाता है। यह परीक्षण ऐसे समय में हुआ है जब मध्य पूर्व में अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच युद्ध की स्थिति बनी हुई है। अमेरिका द्वारा किया गया यह परीक्षण ईरान और दुनिया के लिए एक कड़ा संदेश माना जा रहा है।
'मिनटमैन 3' (डूम्स डे मिसाइल) की भयानक ताकत अमेरिका द्वारा कैलिफोर्निया के वैंडेनबर्ग स्पेस फोर्स बेस से फायर की गई यह एक इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) है, जिसने परीक्षण के दौरान प्रशांत महासागर को पार करते हुए 6,700 किलोमीटर दूर मार्शल आइलैंड पर अपने लक्ष्य को भेदा। इस मिसाइल की कुछ प्रमुख विशेषताएं इस प्रकार हैं:
- अकल्पनीय गति और रेंज: यह मिसाइल आवाज की गति से 23 गुना अधिक तेज (मैक 23) यानी लगभग 28,400 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से उड़ान भर सकती है। इस गति से यह दुनिया के किसी भी कोने में अधिकतम 30 मिनट में पहुंच सकती है। इसकी मारक क्षमता 9,600 किलोमीटर (सीधी दूरी) से लेकर परवलयाकार (parabolic) पथ पर 13,000 किलोमीटर तक है।
- विनाशकारी वॉरहेड: इस मिसाइल में हिरोशिमा और नागासाकी पर गिराए गए परमाणु बमों से 20 गुना अधिक शक्तिशाली परमाणु वॉरहेड ले जाने की क्षमता है, जो करोड़ों लोगों की जान ले सकता है।
- चकमा देने में माहिर (MIRV तकनीक): यह मिसाइल मल्टीपल रीएंट्री व्हीकल (MIRV) क्षमता से लैस है। यह वायुमंडल से बाहर अंतरिक्ष में जाती है और वापस लौटते समय कई मिसाइलों (वॉरहेड) में बंट जाती है, जिससे दुश्मन के मिसाइल रक्षा प्रणालियों में भ्रम पैदा होता है और वे इसे रोक नहीं पाते।
- डूम्स डे प्लेन से संचालन: अमेरिका के पास ऐसी 400 मिसाइलें हर समय अलर्ट पर तैनात हैं। किसी बड़े वैश्विक संकट या प्रलय की स्थिति में अमेरिकी राष्ट्रपति अपने 'डूम्स डे प्लेन' (जैसे यूएस नेवी E6B) में हवा में रहते हुए भी इसे लॉन्च करने का आदेश दे सकते हैं।
ईरान-अमेरिका तनाव और न्यूक्लियर डिटरेंस इस मिसाइल परीक्षण के पीछे का मुख्य कारण ईरान के साथ चल रहा भारी तनाव है। हाल ही में अमेरिका और इजरायल ने मिलकर एक हमला किया था जिसमें ईरान के सुप्रीम लीडर खामेनेई को निशाना बनाया गया। इसके जवाब में ईरान बेहद आक्रामक हो गया है और अमेरिकी व इजरायली ठिकानों पर लगातार हमले कर रहा है। ईरान ने 'ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस' के 22वें चरण के तहत अपनी उन्नत 'खुर्रमशहर' (Khorramshahr) मिसाइल का भी परीक्षण किया है, जो मैक 16 की गति से चलती है और राडार को चकमा दे सकती है।
अमेरिका की एक बड़ी चिंता ईरान का परमाणु कार्यक्रम भी है। ईरान के पास 60% संवर्धित यूरेनियम का जखीरा है; यदि उसने इसे 90% तक संवर्धित कर लिया तो वह परमाणु बम बना सकता है। ईरान में हाल ही में आए भूकंपों को देखकर यह भी कयास लगाए जा रहे थे कि शायद ईरान ने कोई अंडरग्राउंड परमाणु परीक्षण किया है। ऐसे में अमेरिका ने अपनी डूम्स डे मिसाइल का परीक्षण करके दुनिया और खासकर ईरान को 'न्यूक्लियर डिटरेंस' (परमाणु निवारण) का संदेश दिया है कि यदि ईरान ने कुछ भी गलत सोचा, तो अमेरिका के पास ऐसी तकनीक है जिससे बच पाना नामुमकिन होगा।
'डूम्स डे क्लॉक' और 'न्यूक्लियर विंटर' का खौफ लगातार बढ़ते इस तनाव के कारण वैज्ञानिकों द्वारा सेट की जाने वाली 'डूम्स डे क्लॉक' (विनाश की घड़ी) सुर्खी में है। वर्तमान में यह घड़ी मध्यरात्रि (महाप्रलय के समय) से मात्र 85 सेकंड की दूरी पर है, जो यह दर्शाती है कि दुनिया एक भयंकर विनाश के कितने करीब खड़ी है।
वैज्ञानिकों का सबसे बड़ा डर 'न्यूक्लियर विंटर' (परमाणु शीत) है। यदि अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच परमाणु बमों का इस्तेमाल हुआ, तो विस्फोट से उठा मलबा और धुआं पूरी दुनिया के आसमान को ढक लेगा। इससे सूरज की रोशनी धरती तक नहीं पहुंच पाएगी और पूरी दुनिया में एक अंधकार और भयंकर ठंड का माहौल बन जाएगा, जिससे जीवन का अस्तित्व ही संकट में पड़ जाएगा।
निष्कर्ष अमेरिका का मिनटमैन 3 मिसाइल का परीक्षण भले ही शांति स्थापित करने और खौफ पैदा करने के उद्देश्य से किया गया हो, लेकिन यह स्पष्ट करता है कि हथियारों की होड़ और परमाणु युद्ध का खतरा आज के समय में एक बहुत ही गंभीर और वास्तविक चुनौती बन चुका है।







