मिडिल ईस्ट संकट: युद्ध के बीच फंसे लाखों भारतीय, वापसी की गुहार और सरकार के प्रयास
मिडिल ईस्ट (मध्य पूर्व) में इस समय युद्ध के भयंकर हालात बने हुए हैं, जहां ईरान, इज़राइल और अमेरिका के बीच तनाव और हमले चरम पर हैं। इन बिगड़ते हालातों और अस्थिरता के बीच वैश्विक स्तर पर चिंता बढ़ गई है। जहां अमेरिका जैसे देश अपने नागरिकों को सुरक्षित निकालने के लिए युद्ध स्तर पर काम कर रहे हैं, वहीं मिडिल ईस्ट के विभिन्न देशों में रह रहे और फंसे हुए लगभग 1 करोड़ भारतीयों की स्थिति एक गंभीर चिंता का विषय बन गई है।
अमेरिका का रेस्क्यू ऑपरेशन मिडिल ईस्ट में संभावित खतरे को देखते हुए अमेरिका ने अपने नागरिकों को वहां से निकलने की सलाह दी है। अमेरिका ने इसके लिए बकायदा मुफ्त चार्टर प्लेन की व्यवस्था की है। अमेरिकी विदेश विभाग ने एक वेबसाइट और फोन नंबर जारी कर प्रक्रिया को इतना सरल कर दिया है कि नागरिकों को केवल अपनी जानकारी भरनी होती है और उन्हें निकाल लिया जाता है। इस अभियान के तहत अब तक 9000 से अधिक अमेरिकी नागरिकों को सुरक्षित निकाला जा चुका है।
मिडिल ईस्ट में भारतीयों की विशाल आबादी अमेरिका की तुलना में भारतीयों की स्थिति कहीं अधिक जटिल है क्योंकि मिडिल ईस्ट में काम करने और रहने वाले भारतीयों की संख्या बहुत बड़ी है। एक अनुमान के मुताबिक वहां लगभग 1 करोड़ भारतीय मौजूद हैं। आंकड़ों के अनुसार, सऊदी अरब में 27 लाख, यूएई (UAE) में 35 लाख, कुवैत में 10 लाख, कतर में 8 लाख, ओमान में 6.5 लाख और बहरीन में 3.5 लाख भारतीय रहते हैं। इतनी बड़ी आबादी की सुरक्षा सुनिश्चित करना एक चुनौतीपूर्ण कार्य है।
फंसे हुए भारतीयों की प्रमुख चुनौतियां युद्ध के माहौल और मिसाइल हमलों के डर से यात्री विमानों के रूट बदल दिए गए हैं और उन्हें लंबे रास्तों से निकाला जा रहा है। कई उड़ानें रद्द हो गई हैं जिससे वहां काम करने गए लोगों के साथ-साथ टूरिस्ट वीजा पर गए भारतीय बुरी तरह फंस गए हैं।
फंसे हुए भारतीयों को निम्नलिखित गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है:
- दवाइयों का भारी संकट: जो भारतीय टूरिस्ट वीजा पर गए थे, वे अब सबसे ज्यादा परेशान हैं। मिडिल ईस्ट के देशों में बिना वहां के डॉक्टर के प्रिस्क्रिप्शन के दवाइयां नहीं मिलतीं। भारतीय डॉक्टरों की पर्ची वहां मान्य नहीं है, जिसके कारण नियमित दवाइयां (जैसे साल्ट्स) लेने वाले मरीजों की स्थिति गंभीर हो गई है।
- होटल और भोजन की समस्या: अचानक फ्लाइट्स रद्द होने से लोगों की यात्रा 10-10 दिन आगे खिसक गई है। इस दौरान उनके पास न तो होटलों की उचित व्यवस्था है और न ही खाने-पीने की, जिसके कारण लंबी लाइनें लग रही हैं।
- समुद्री मार्ग पर खतरा: केवल हवाई मार्ग ही नहीं, बल्कि समुद्री रास्ते भी सुरक्षित नहीं हैं। ओमान की खाड़ी में भारतीय झंडे वाले 37 जहाज और लगभग 1100 भारतीय नाविक फंसे हुए हैं क्योंकि जहाजों पर हमलों के कारण उन्हें बीच में ही रोक दिया गया है।
भारत सरकार के प्रयास और वर्तमान आवश्यकताएं भारत सरकार लगातार स्थिति पर नज़र बनाए हुए है। प्रधानमंत्री द्वारा सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति (CCS) की बैठक भी बुलाई गई थी। विदेश मंत्रालय ने कांसुलर सर्विस मैनेजमेंट सिस्टम के जरिए मदद के लिए एक लिंक जारी किया है और दूतावास वहां के अधिकारियों के संपर्क में हैं।
हालांकि, यात्रियों की शिकायत है कि जारी किए गए कई हेल्पलाइन नंबर काम नहीं कर रहे हैं। ऐसे में यह मांग उठ रही है कि:
- भारत सरकार भी अमेरिका की तरह चैटबॉट या सरल वेबसाइट आधारित तकनीकी व्यवस्था लागू करे जिससे लोगों से तुरंत संपर्क हो सके।
- जो लोग टूरिस्ट वीजा पर हैं, बीमार हैं, बुजुर्ग हैं या जिनके साथ छोटे बच्चे हैं, उन्हें निकालने में प्राथमिकता दी जाए।
- जो कामगार वर्क वीजा पर हैं, उनकी वहां सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए दूतावासों की सक्रियता बढ़ाई जाए।
भारत सरकार ने इससे पहले रूस-यूक्रेन युद्ध और कई अफ्रीकी संकटों के दौरान अपने नागरिकों को सफलतापूर्वक निकाला है। वर्तमान समय में एक बार फिर उसी तत्परता की आवश्यकता है ताकि मिडिल ईस्ट में फंसे भारतीयों में विश्वास बहाल किया जा सके और उन्हें सुरक्षित उनके घर वापस लाया जा सके।







