पाकिस्तान में सियासी संकट: जेल में बंद पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की बिगड़ती सेहत और लोकतंत्र पर उठते सवाल
पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री और 1992 में देश को क्रिकेट विश्व कप जिताने वाले कप्तान इमरान खान इन दिनों अपने जीवन के सबसे कठिन और चुनौतीपूर्ण दौर से गुजर रहे हैं। जनता के बीच अपार लोकप्रियता हासिल करने वाले इमरान खान को वर्तमान सरकार और पाकिस्तानी सेना ने लगभग बंधक बनाकर 14 साल से अधिक की सजा के तहत 2023 से अदियाला जेल में रखा हुआ है।
गंभीर स्वास्थ्य संकट और दुनिया भर से उठी मांग जेल में इमरान खान की स्वास्थ्य स्थिति बेहद चिंताजनक बनी हुई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, वे 'सेंट्रल रेटिनल वेन ऑक्यूजन' (Central Retinal Vein Occlusion) नामक बीमारी से जूझ रहे हैं, जिसके चलते उनकी एक आंख की रोशनी लगभग 85% तक जा चुकी है और वे केवल 15% ही देख पा रहे हैं। इस बीमारी में रेटिना की नस ब्लॉक हो जाती है, जिससे आंखों की रोशनी पूरी तरह जाने का खतरा रहता है।
हैरानी की बात यह है कि उन्हें उनके निजी डॉक्टरों से मिलने नहीं दिया जा रहा है और इलाज में भारी कोताही बरती जा रही है। एक पूर्व प्रधानमंत्री और विश्व कप विजेता कप्तान के साथ हो रहे इस अमानवीय व्यवहार को देखते हुए दुनिया भर के 14 पूर्व क्रिकेट कप्तानों ने पाकिस्तान सरकार को पत्र लिखा है। इसमें ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड, भारत (सुनील गावस्कर और कपिल देव), वेस्टइंडीज और न्यूजीलैंड के दिग्गज खिलाड़ी शामिल हैं, जिन्होंने इमरान खान के लिए कम से कम सम्मानजनक और उचित चिकित्सा सुविधा की मांग की है।
राजनीतिक तख्तापलट और मुकदमों का जाल इमरान खान पाकिस्तान के संभवतः इकलौते प्रधानमंत्री हैं जिन्हें संसद में अविश्वास प्रस्ताव (नो कॉन्फिडेंस मोशन) के जरिए अप्रैल 2022 में हटाया गया था। आरोप है कि रूस के साथ उनके बढ़ते संबंधों और स्वतंत्र विदेश नीति से नाराज होकर अमेरिका (डोनाल्ड लू) ने शहबाज शरीफ और पाकिस्तानी सेना के साथ मिलकर उनकी सरकार गिराई थी।
सत्ता से हटने के बाद उन पर कई गंभीर मुकदमे लाद दिए गए। इनमें तोशाखाना मामला (विदेशों से मिले उपहारों को बेचना), अल-कादिर ट्रस्ट केस (लैंड माफिया से करीब 600 करोड़ की जमीन का मामला), और साइफर मामला (अमेरिका के सीक्रेट डॉक्यूमेंट्स उजागर करना) शामिल हैं। इसके अलावा उन पर सेना के खिलाफ जनता को उकसाने और हिंसा फैलाने का भी आरोप है।
सेना का दमन और समर्थकों का संघर्ष इमरान खान की गिरफ्तारी के बाद पाकिस्तान में सेना के खिलाफ भारी विरोध प्रदर्शन हुए, जिन्हें सेना ने बेरहमी से कुचल दिया। इसके बावजूद, उनकी पार्टी 'तहरीक-ए-इंसाफ' (PTI), उनकी बहनें (नूरीन नियाजी और अलीमा खान) और समर्थक लगातार उनकी रिहाई के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
हाल ही में खैबर पख्तूनख्वा के मुख्यमंत्री के नेतृत्व में समर्थकों ने मुख्य पाकिस्तान को जोड़ने वाले 'अटक ब्रिज' को जाम कर दिया, जिसके बाद पाकिस्तान के आंतरिक मंत्री मोहसिन नकवी ने प्रदर्शनकारियों को खुली धमकियां दीं। इमरान खान को बाहरी दुनिया से पूरी तरह अलग-थलग (Isolate) कर दिया गया है। उनके दोनों बेटे (कासिम और सुलेमान) जो यूके में रहते हैं, उन्हें अपने पिता से मिलने के लिए पाकिस्तान का वीजा तक नहीं दिया जा रहा है।
निष्कर्ष इमरान खान का यह पूरा प्रकरण पाकिस्तान में सेना के गहरे वर्चस्व और राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता के सबसे क्रूर रूप को दर्शाता है। जिस व्यक्ति ने कभी खेल के मैदान में पाकिस्तान का सिर गर्व से ऊंचा किया था, आज उसी देश की सत्ता ने उन्हें उनके बुनियादी मानवाधिकारों और उचित इलाज तक से वंचित कर दिया है। पाकिस्तान की जनता और सिविल सोसाइटी आज भी इस उम्मीद में है कि उनके सबसे लोकप्रिय नेता को न्याय मिलेगा।







