साउथ ब्लॉक से 'सेवा तीर्थ' तक: पीएम मोदी के नए कार्यालय की विशेषताएँ और विजन
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आधिकारिक तौर पर अपने कार्यालय को साउथ ब्लॉक से नई इमारत में स्थानांतरित कर दिया है। कर्तव्य पथ पर स्थित प्रधानमंत्री के इस नए कार्यालय को 'सेवा तीर्थ' नाम दिया गया है। यह बदलाव केवल स्थान का नहीं, बल्कि कार्य संस्कृति में बदलाव का भी प्रतीक है, जिसे 'नागरिक देवो भव' (नागरिक ही ईश्वर है) की टैगलाइन के साथ शुरू किया गया है।
'सेवा तीर्थ': शासन नहीं, सेवा का केंद्र प्रधानमंत्री का नया कार्यालय अब 'सेवा तीर्थ' कॉम्प्लेक्स के नाम से जाना जाएगा। साउथ ब्लॉक, जो पिछले 78 सालों से (1947 से) देश की सत्ता का केंद्र था, उसे छोड़कर प्रधानमंत्री ने नई इमारत में प्रवेश किया है। इस कार्यालय के उद्घाटन के साथ ही यह संदेश दिया गया है कि यहाँ देश पर शासन करने की नहीं, बल्कि सेवा को सर्वोपरि मानने की संस्कृति होगी।
कार्यभार संभालते ही लिए गए बड़े फैसले प्रधानमंत्री ने अपनी नई सीट पर बैठते ही जनहित से जुड़े कई महत्वपूर्ण फैसलों पर हस्ताक्षर किए, जो इस कार्यालय की प्राथमिकता को दर्शाते हैं:
1. दुर्घटना पीड़ितों के लिए: एक्सीडेंट पीड़ितों के लिए 1.5 लाख रुपये तक के कैशलेस इलाज की सुविधा।
2. लखपति दीदी योजना: इस योजना का लक्ष्य 3 करोड़ से बढ़ाकर 6 करोड़ कर दिया गया है।
3. कृषि इंफ्रास्ट्रक्चर कोष: इसे 1 लाख करोड़ रुपये से बढ़ाकर 2 लाख करोड़ रुपये करने की मंजूरी दी गई।
4. स्टार्टअप इंडिया फंड 2.0: इसके लिए 10,000 करोड़ रुपये का कोष जारी किया गया।
सेंट्रल विस्टा और 'सेवा तीर्थ' की आवश्यकता क्यों? वर्ष 2014 से ही सरकार का प्रयास गुलामी की मानसिकता के प्रतीकों को छोड़कर नई व्यवस्था बनाने का रहा है। पुरानी इमारतें (नॉर्थ और साउथ ब्लॉक) अंग्रेजों के समय की थीं और 78 साल पुरानी होने के कारण जर्जर हो रही थीं। इसके अलावा, सरकार के अलग-अलग मंत्रालय दिल्ली में विभिन्न जगहों पर बिखरे हुए थे, जिससे उनके किराए और रखरखाव पर भारी खर्च (लगभग 1500 करोड़ रुपये का रेंट) हो रहा था और कार्यों में देरी होती थी।
सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट के तहत 51 मंत्रालयों को एक ही जगह 'सेंट्रल सेक्रेटेरिएट' में लाने की योजना है ताकि आपसी समन्वय बेहतर हो सके। इसी कड़ी में प्रधानमंत्री ने 'कर्तव्य भवन 1' और 'कर्तव्य भवन 2' का भी उद्घाटन किया, जहाँ अब वित्त, रक्षा, स्वास्थ्य और कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय कार्य करेंगे।
इमारत की खासियतें और भविष्य की योजना
• निर्माण और लागत: 'सेवा तीर्थ' (जिसे पहले एग्जीक्यूटिव एन्क्लेव कहा जाना था) का निर्माण L&T कंपनी द्वारा लगभग 1189 करोड़ रुपये की लागत से किया गया है।
• ग्रीन रेटिंग: यह इमारत '4-स्टार गृह (GRIHA) मानकों' पर आधारित है, जिसमें एनर्जी एफिशिएंसी, जल संरक्षण और वेस्ट मैनेजमेंट की आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया गया है।
• पुराने भवनों का भविष्य: नॉर्थ ब्लॉक और साउथ ब्लॉक जैसी पुरानी इमारतों को 'युगे युगीन भारत म्यूजियम' में तब्दील कर जनता के लिए खोल दिया जाएगा।
सरकार का लक्ष्य है कि अक्टूबर 2026 तक सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट के तहत बाकी बची इमारतों का निर्माण भी पूरा कर लिया जाए, जिससे पूरा केंद्रीय सचिवालय एक ही स्थान पर एकीकृत हो सके। 'सेवा तीर्थ' का उद्घाटन आधुनिक भारत की बढ़ती जरूरतों और कार्यक्षमता को बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।







